मीरा और पीपल का दोस्त | बच्चों की कहानी

Hindikunj
0

मीरा और पीपल का दोस्त

क बार की बात है, एक छोटे से गाँव में मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। मीरा को जंगल बहुत पसंद था। हर शाम वो स्कूल से लौटते ही अपनी छोटी-सी पीली बाल्टी लेकर निकल पड़ती और जंगल की ओर चल देती। वहाँ उसे एक पुराना पीपल का पेड़ मिला था जिसके नीचे हमेशा हल्की-हल्की ठंडी हवा चलती रहती। 

मीरा और पीपल का दोस्त
मीरा उसी पेड़ के पास बैठकर कभी चिड़ियों से बातें करती, कभी पत्तों को इकट्ठा करके छोटे-छोटे घर बनाती। एक दिन जब वो पेड़ के नीचे बैठी थी तो उसे एक छोटा-सा खरगोश दिखा। खरगोश का एक पैर थोड़ा सा लंगड़ा रहा था। वो बार-बार ठोकर खा रहा था और दुखी-दुखी बैठ गया था। मीरा ने धीरे से पास जाकर पूछा,

“तुम्हें चोट लगी है क्या?”खरगोश ने बड़े उदास स्वर में कहा,

“हाँ… मैं तेज़ भाग रहा था, एक पत्थर से टकरा गया। अब दौड़ नहीं पा रहा।”मीरा ने अपनी बाल्टी में से एक साफ़ रुमाल निकाला और बहुत प्यार से खरगोश के पैर पर बाँध दिया। फिर उसने अपनी जेब से निकालकर एक छोटा-सा गाजर का टुकड़ा खरगोश को दे दिया। खरगोश ने गाजर खाई और थोड़ी देर बाद बोला,

“अब थोड़ा अच्छा लग रहा है… शुक्रिया मीरा।”अगले दिन मीरा फिर उसी पीपल के पेड़ के पास गई। देखा तो वही खरगोश आया था, पर इस बार उसके साथ तीन और छोटे खरगोश थे। सबके गले में फूलों की मालाएँ थीं। बड़ा खरगोश बोला,

“ये मेरे बच्चे हैं। हम सबने मिलकर तुम्हारे लिए ये माला बनाई है। तुमने मेरी मदद की, अब हम तुम्हारी दोस्त बन गए हैं।”मीरा ने बहुत खुशी से माला गले में पहनी और हँसते-हँसते बोली,

“अब तो जंगल और भी मज़ेदार हो गया!”तब से हर शाम मीरा और खरगोश का पूरा परिवार पीपल के नीचे मिलता। कभी गाना गाते, कभी कहानियाँ सुनाते, कभी सिर्फ़ चुपचाप हवा के साथ हिलती पत्तियों को देखते रहते। और गाँव वाले कहते,

“मीरा के पास अब सबसे प्यारा जंगल का परिवार है।”बस, यहीं पर उनकी छोटी-सी खुशहाल दुनिया चलती रही।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)
To Top