विद्यार्थियों को राजनीति में भाग क्यों लेना चाहिए

Hindikunj
0

विद्यार्थियों को राजनीति में भाग क्यों लेना चाहिए

विद्यार्थी जीवन वह काल है जब व्यक्ति की ऊर्जा, उत्साह और आदर्शवाद चरम पर होता है। इस उम्र में विद्यार्थी न केवल ज्ञान अर्जित करते हैं बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने लगते हैं। राजनीति, जो समाज की दिशा निर्धारित करने वाली प्रक्रिया है, में विद्यार्थियों की भागीदारी इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह उन्हें मात्र दर्शक बनने के बजाय सक्रिय योगदानकर्ता बनाती है। राजनीति को अक्सर वयस्कों का क्षेत्र माना जाता है, लेकिन इतिहास हमें बताता है कि युवा शक्ति ने ही कई क्रांतियों और परिवर्तनों को जन्म दिया है। उदाहरण के लिए, स्वतंत्रता संग्राम में छात्रों की भूमिका से लेकर आधुनिक लोकतंत्रों में युवा आंदोलनों तक, विद्यार्थी राजनीति ने समाज को नई दिशा दी है।

विद्यार्थियों को राजनीति में भाग क्यों लेना चाहिए
यदि विद्यार्थी राजनीति से दूर रहते हैं, तो वे समाज के महत्वपूर्ण निर्णयों से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनकी आवाज दब जाती है और सत्ता उन हाथों में चली जाती है जो शायद उनके हितों की रक्षा न कर सकें।राजनीति में भाग लेकर विद्यार्थी अपने व्यक्तिगत विकास को भी मजबूत करते हैं। यह उन्हें नेतृत्व कौशल, बहस करने की क्षमता, टीम वर्क और समस्या समाधान की कला सिखाती है। कक्षा में पढ़ाई से प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक रूप दिया जा सकता है। जैसे कि छात्र संघ चुनावों में भाग लेना या सामाजिक मुद्दों पर बहस करना, ये अनुभव विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से परिचित कराते हैं। इसके अलावा, राजनीति में सक्रियता से वे सामाजिक असमानताओं, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और युवा रोजगार जैसे मुद्दों पर प्रभाव डाल सकते हैं। आज के दौर में जब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने राजनीति को अधिक सुलभ बना दिया है, विद्यार्थी अपनी राय को वैश्विक स्तर पर पहुंचा सकते हैं, जिससे वे न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तन के वाहक बनते हैं। यदि वे राजनीति से अलग रहते हैं, तो वे उन नीतियों के शिकार बन जाते हैं जो उनके भविष्य को प्रभावित करती हैं, जैसे शिक्षा नीतियां या रोजगार अवसर।इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों की राजनीतिक भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है, और युवा वर्ग, जो आबादी का बड़ा हिस्सा है, यदि राजनीति में सक्रिय नहीं होता तो लोकतंत्र अधूरा रह जाता है। वे नई सोच, नवाचार और नैतिक मूल्यों को राजनीति में लाते हैं, जो पुरानी व्यवस्था को चुनौती देती है और भ्रष्टाचार या सत्ता के दुरुपयोग को कम करती है। इतिहास में देखें तो भारत में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में छात्र आंदोलन ने आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाई, जिसने लोकतंत्र की रक्षा की। इसी प्रकार, विश्व स्तर पर अरब स्प्रिंग या क्लाइमेट स्ट्राइक्स में युवाओं की भूमिका ने दिखाया कि राजनीति में उनकी भागीदारी कैसे वैश्विक परिवर्तन ला सकती है। राजनीति को गंदा खेल मानकर इससे दूर रहना विद्यार्थियों के लिए हानिकारक है, क्योंकि इससे वे अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते हैं और समाज की प्रगति में योगदान नहीं दे पाते। इसके बजाय, सक्रिय भागीदारी से वे राजनीति को शुद्ध और प्रभावी बना सकते हैं।अंत में, विद्यार्थियों को राजनीति में भाग लेना चाहिए क्योंकि यह उनके भविष्य का निर्माण करता है। वे न केवल खुद को सशक्त बनाते हैं बल्कि समाज को बेहतर बनाते हैं।

राजनीति में भागीदारी से वे जागरूक नागरिक बनते हैं, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होकर सकारात्मक बदलाव लाते हैं। यदि विद्यार्थी राजनीति से अलग रहेंगे, तो वे मात्र उपभोक्ता बनकर रह जाएंगे, लेकिन भाग लेकर वे सृजनकर्ता बन सकते हैं। इसलिए, हर विद्यार्थी को राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए, ताकि वे एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकें।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)
To Top