वैश्विक गांव Global Village में हमारी सांस्कृतिक पहचान
गांवों से शहरों और फिर विदेशों की ओर पलायन करने वाली पीढ़ियां अक्सर अपनी भाषा, रीति-रिवाज और मूल्यों को भूलने लगती हैं। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का प्रयोग घट रहा है, जबकि अंग्रेजी वैश्विक संचार की भाषा बन गई है। कई परिवारों में बच्चे अपनी मातृभाषा कम बोलते हैं और अंग्रेजी या मिश्रित भाषा में बात करते हैं। त्योहार भी अब व्यावसायिक और दिखावटी हो रहे हैं, जहां भावनात्मक गहराई कम और बाहरी चमक ज्यादा दिखती है।फिर भी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत उसकी लचीलापन और समावेशी स्वभाव में है। यह संस्कृति सदियों से बाहर से आने वाले प्रभावों को ग्रहण करती आई है और उन्हें अपने अंदर समाहित कर अपनी समृद्धि बढ़ाती रही है। वैश्विक गांव में भी यही हो रहा है। हम पश्चिमी तकनीक और जीवनशैली को अपनाते हैं, लेकिन साथ ही योग, आयुर्वेद, ध्यान और भारतीय दर्शन को भी दुनिया को सौंपते हैं। वैश्विक मंच पर भारतीयता अब एक ब्रांड बन रही है। लोग भारतीय संस्कृति को न केवल देखते हैं, बल्कि अपनाते भी हैं। यह एक तरह से सांस्कृतिक आदान-प्रदान है, जहां हम हार नहीं रहे, बल्कि अपनी पहचान को और मजबूत कर रहे हैं।सच्चाई यह है कि वैश्विक गांव हमें मजबूर नहीं करता कि हम अपनी सांस्कृतिक पहचान छोड़ दें। यह हमें विकल्प देता है। जो लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं, वे अधिक मजबूती से जुड़ सकते हैं।
सोशल मीडिया पर भारतीय संस्कृति से जुड़े पेज, चैनल और समुदाय बढ़ रहे हैं। युवा पीढ़ी अब अपनी परंपराओं को नए रूप में पेश कर रही है—चाहे वह फ्यूजन म्यूजिक हो, कंटेम्पररी डांस हो या डिजिटल माध्यम से त्योहार मनाना हो। सरकार और समाज भी प्रयास कर रहे हैं कि गांवों की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों को भूलें नहीं।अंततः वैश्विक गांव में हमारी सांस्कृतिक पहचान न तो पूरी तरह खतरे में है और न ही पूरी तरह सुरक्षित। यह एक निरंतर यात्रा है, जहां हमें सतर्क रहते हुए अपनी विरासत को संजोना है और साथ ही वैश्विक बदलावों को अपनाते हुए उसे जीवंत रखना है। यदि हम अपनी विविधता, सहिष्णुता, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूती से थामे रहें, तो वैश्विक गांव में भारतीय सांस्कृतिक पहचान न केवल बचेगी, बल्कि चमकेगी और दुनिया को नई दिशा भी देगी। क्योंकि सच्ची संस्कृति वही है जो बदलते समय के साथ विकसित होती है, लेकिन अपनी आत्मा को कभी नहीं खोती।
