किशोर की ललकार

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किशोर की ललकार


किसी की जमीर पर
लात-घूसा मत मारो

किशोर की ललकार
उम्र में छोटा है
कमजोर समझ कर
तीर मत चलाओ

बच्चा समझकर
मां को अपमानित करोगे
सत्ता का चाबुक चलाओगे

ज्यादती करोगे
चीर-फाड़कर रख दूंगा

पन्द्रह वर्षीय किशोर की
बोल पड़ी आत्मा

जब पुलिस ने उसकी माँ को
अपशब्दों से नवाजा

चींटी गुड़ खाती है (बाल-कविता)

चींटी रोज मेरे घर आती है, 
झोले में रखे गुड़ खाती है। 

गुड़ खा-खाकर खूब हंसती हैं, 
अपने बच्चों को भी लाती है। 

एक दिन चींटी नही आयी,,
क्यों नहीं आज वह आयी। 

पता करने मैं घर पर गया, 
वहां किसी को नहीं पाया। 

पड़ोसी से पूछा, कहाँ गयी है?
वह बोला- दवा लेने गयी है। 

गुड़ खाने से हुआ यह हाल, 
दवा खाने से सही है अब हाल।


- जयचन्द प्रजापति 'जय'
प्रयागराज

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