नारी सशक्तिकरण

Hindikunj
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नारी सशक्तिकरण


दिशा
उम्र 18 वर्ष,
जगथाना, उत्तराखंड


वो चूल्हा-चौका ही नहीं, अब कलम भी चलाती है,
लड़की कोई बोझ नहीं, अब आसमान छू जाती है,
कोमल और कमजोर नहीं, हर तूफान से लड़ती है,
शिक्षा की मशाल थाम कर अंधेरों को हरती है,
बेटी, बहन, माँ बनकर अपने हक की बात करती है,
सपनों को पंख लगाकर अपनी राह खुद चुनती है,
झुकेगी नहीं, रुकेगी नहीं, हर मुश्किल से लड़ेगी,
अपने फैसलों और सपनों की खुद आवाज़ बनेगी।
नारी है वो, शक्ति है वो, बदलाव की पहचान है,
अपने हौसले से लिखती अब अपनी नई उड़ान है।।
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मन की खामोशी

कविता बिष्ट
उत्तराखंड


मन की खामोशी
पता नहीं क्यों ये मन हमेशा उदास रहता है,

होंठों पर मुस्कान, पर दिल खामोश रहता है,
खुश रहने की कोशिश करती हूँ हर दिन,
पर खुशी जैसे मुझसे रूठ गई है कहीं,
अपनों के बीच रहकर भी सुकून नहीं मिलता,
दूर रहूँ तो फिर मन को चैन नहीं मिलता,
लोग मेरी हँसी देखते हैं, आँखों की नमी नहीं,
मेरे दर्द की आवाज़ सुनता कोई नहीं,
शायद लड़ते-लड़ते खुद से दूर हो गई हूँ,
फिर भी एक उम्मीद है, एक दिन खुद से मिल जाऊँगी।।
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कायर कौन है?

पिंकी अरमोली
उत्तराखंड


जब लड़की सपने देखती है, समाज सवाल उठाता है,
“तुम लड़की हो” कहकर हर कदम पर रोक लगाता है,
कभी बोझ कहा जाता, कभी सपनों को छोटा किया जाता है,
उसकी आवाज़ को दबाकर उसे ही कमजोर बताया जाता है,
पर जो डर के बावजूद अपने सपनों की ओर बढ़ती है,
जो गिरकर फिर उठती है, वही तो हिम्मत करती है,
अब सवाल यह नहीं कि लड़की कायर है या नहीं?
सवाल यह है कि उसके सपनों से डरता कौन है?
वह लड़की है, वह शक्ति है, वह अपनी पहचान बनाएगी,
जो राह रोकी गई थी कभी, उसी राह पर आगे बढ़ती जाएगी।।
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क्या यही मेरा जीवन है?

तनुजा भंडारी
उत्तराखंड


क्या पहनूँ, कहाँ जाऊं, हर फैसले पर पहरा है,
किससे कहूं, क्या कहूँ, हर कदम पर सवाल खड़ा है,
घर हो या बाहर, डर जैसे हर राह में साथ है,
कब आएगा वह दिन जब कहूं, ज़िंदगी मेरे साथ है,
पर अब मैं अपने डर से आगे बढ़ना सीखूँगी,
गिरूँगी तो फिर उठूँगी, अपने सपनों के लिए लड़ूँगी,
मैं सिर्फ एक लड़की नहीं, मैं हिम्मत और रोशनी हूँ,
मैं अपने सपनों की आवाज़ और अपनी पहचान हूँ,
अब कोई और तय नहीं करेगा कि मुझे कैसे जीना है,
खुले आकाश में उड़ना, यही मेरे जीवन का सपना है।।

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