तेरे बिना मैं अधूरा हूँ
सुबह की पहली किरण जब आँगन में उतरती है, तो लगता है जैसे वह तेरा ही स्पर्श लेकर आई है। उस सुनहरे उजाले में तेरी हँसी की गूँज सुनाई देती है, और मैं आँखें बंद करके उस आवाज़ को अपने भीतर उतार लेता हूँ। पर जब आँखें खुलती हैं और तू नहीं होती, तो वही किरण अचानक फीकी पड़ जाती है, जैसे किसी ने रंगों से रौशनी छीन ली हो।
मैं सोचता हूँ, प्रेम क्या है? क्या वह केवल किसी के चेहरे की सुंदरता है या फिर किसी के स्पर्श की गर्माहट? मेरे लिए प्रेम तू है—तेरा बिना कहे सब कुछ समझ लेना, तेरा मेरी चुप्पी में भी अपनी आवाज़ सुन लेना। जब तू पास होती है, तो समय रुक जाता है, घड़ी की सुइयाँ शरारत करने लगती हैं, और हर लम्हा एक पूरी सदी बन जाता है। जब तू दूर होती है, तो वही सुइयाँ पत्थर बन जाती हैं, और हर गुजरता पल मुझे अधूरा कर जाता है।
तेरे बिना बारिश भी अधूरी है। वह पानी जो कभी तेरे साथ भीगने पर गीत लिखवाता था, अब केवल भीगते कपड़ों की व्यथा कहता है। मैं अपनी छत पर खड़ा होकर बादलों से पूछता हूँ, "कहाँ है वह, जिसके लिए तुमने मुझसे मिलने का वादा किया था?" और बादल चुपचाप बरसते रहते हैं, जैसे उनके पास भी कोई जवाब नहीं है।
रातों की बात मत पूछो। चाँद जब पूरा होता है, तो वह मुझे तेरी आँखों की याद दिलाता है। तारे जब टिमटिमाते हैं, तो वे तेरे हँसने के उस लहजे को दोहराते हैं जब तू कोई शरारत करती थी। मैं तकिये से तेरे बालों की खुशबू माँगता हूँ, और तकिया केवल मेरे आँसू सोख लेता है। नींद आती है तो तेरे सपनों के साथ, और जब आँख खुलती है तो तेरी कमी की चुभन के साथ।
एक बार तूने मुझसे पूछा था, "प्रेम कितने प्रकार का होता है?" मैंने हँसकर टाल दिया था। पर आज मैं कहूँगा—प्रेम सिर्फ एक ही प्रकार का होता है, और वह है तू। तेरा गुस्सा, तेरा प्यार, तेरी चुप्पी, तेरी बातें, तेरा रूठना, तेरा मनाना—सब कुछ वही प्रेम है जिसे शब्दों में बाँधना मूर्खता होगी।
मैं कहीं नहीं जाता। तू चाहे जितनी दूर चली जाए, मेरी रूह की डोर तुझसे बँधी है। जिस दिन तूने पहली बार मेरी तरफ देखा था, उस दिन मैंने खुद को तुझमें खो दिया था। अब खोजने जाऊँ तो अपना कोई निशाँ तक नहीं मिलता। सब कुछ तू है। मेरी हँसी तू है, मेरा दर्द तू है, मेरा अकेलापन तू है और मेरा होना भी तू है।
बस इतना जान ले—तू नहीं तो मैं भी नहीं। तू है तो यह संसार भी सुंदर है। तू आएगी एक दिन, चाहे आज नहीं तो कल, चाहे इस जनम में नहीं तो अगले में। पर हर जनम में मैं तुझे ढूँढूंगा, तुझे पहचानूंगा, तुझे चाहूंगा। यही तो प्रेम है न—बिना किसी शर्त के, बिना किसी थकान के, बस एक बहती हुई नदी की तरह जो समंदर से मिलने के लिए बेचैन रहती है।
तू ही मेरा समंदर है। और मैं बस तेरी तरफ बहता रहने वाला एक पागल पानी हूँ।
